
दो दशक बाद शोपियाँ के अर्धनारीश्वर मंदिर में पूजा हुई, (फोटो साभार: लाइव हिंदुस्तान)
करीब दो दशक बाद कश्मीर घाटी के शोपियाँ जिले में स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर में फिर से भगवान भोलेनाथ के जयकारे गूंजे। इस महत्वपूर्ण धार्मिक घटना की एक दुर्लभ बात यह भी रही, कि इस आयोजन में स्थानीय मुसलमानों ने भी कश्मीरी पंडितों का स्वागत किया और उनके साथ इस अनुष्ठान में शामिल हुए। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने कहा, मंदिर का जीर्णोद्धार आने वाली पीढ़ियों के लिए आशापूर्ण भविष्य का प्रतीक है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर दूर-दराज के इलाकों से भी लोग आए और पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित किया। अधिकारियों ने इस कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए बताया, कि यह आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर शोपियाँ के उपायुक्त (डीसी) मोहम्मद शाहिद सलीम डार ने स्वयं अर्धनारीश्वर मंदिर का दौरा किया।
इस दौरान उपायुक्त ने मंदिर परिसर में पूजा करने आए भक्तों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। कश्मीरी विस्थापितों ने डीसी से मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ ही उनके घरों की रखरखाव, उनके लिए कॉलोनी बसाने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की। इस पर डीसी ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया, ताकि भविष्य में भी श्रद्धालुओं को उचित सुविधाएं मिल सकें।
गौरतलब है, कि इस धार्मिक आयोजन का स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने स्वागत करते हुए कहा, कि यह घटना उन लोगों के लिए एक संदेश है, जो कश्मीर में केवल हिंसा और संघर्ष की तस्वीर देखते है। कश्मीरी पंडितों का इस तरह से अपने मंदिरों में लौटना और पूजा करना घाटी में नए उम्मीदों और संभावनाओं को जन्म देता है।