
पोर्शे कार का एक्सीडेंट, (फोटो साभार :TOI)
पुणे में करोड़ों की पोर्शे कार से बाइक सवार युवक-युवती को कुचलने वाले नाबालिग रईसजादे का ब्लड सैंपल उसकी माँ के खून से ही बदल दिया गया था। उसकी माँ ने अपना खून पुणे के ससून अस्पताल में दिया था, ताकि बेटे के खून की जाँच ना हो। वहीं दूसरी तरफ ससून अस्पताल के डीन ने दावा किया है, कि ब्लड सैंपल बदलने की साजिश रचने वाले डॉक्टर अजय तावड़े की नियुक्ति एक स्थानीय विधायक के कहने पर की गई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 मई की सुबह जब नाबालिग रईसजादे का ब्लड सैंपल लिया गया था, तो उस वक्त उसकी माँ वहीं मौजूद थी। इस दौरान उसने अपना खून सैंपल बदलने के लिए दिया था। अस्पताल की फॉरेंसिक लैब में श्रीहरी हल्नोर ने यह सैंपल बदला था। यह सैंपल डॉक्टर अजय तावड़े के कहने पर बदला गया था। अब पुलिस रईसजादे की माँ की खोजबीन कर रही है, लेकिन उसका कोई पता नहीं लग रहा है।
BREAKING: Investigation finds that Shivani Agarwal, mother of the teen Porsche driver, got her blood sample swapped with his at Sassoon Hospital during medical test to mask alcohol content. Police now on the look-out for her, she has left Pune, reports @divyeshas on @IndiaToday: pic.twitter.com/vpRnppNGYS
— Shiv Aroor (@ShivAroor) May 30, 2024
उल्लेखनीय है, कि नाबालिग रईसजादे का ब्लड सैंपल बदलने वाले दो डॉक्टरों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस की जांच में सामने आया था, कि नाबालिग के असली ब्लड सैंपल को कूड़ेदान में फेंक दिया गया था, वहीं इसके स्थान पर बदले हुए ब्लड सैंपल का परिक्षण किया गया था, जिसमें खून में अल्कोहल होने की बात सामने नहीं आई थी।
पुलिस ने शक होने पर सैंपल की डीएनए जाँच करवाई थी, जिसमें इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने सैंपल बदलने वाले डॉक्टर हल्नोर और फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख अजय तावड़े को गिरफ्तार कर लिया था। इन दोनों डॉक्टरों पर अब अस्पताल ने भी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
मीडिया में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है, कि जिस दिन नाबालिग का ब्लड सैंपल लिया गया था, उसी दिन डॉ अजय तावड़े से नाबालिग के पिता ने बात की थी। दोनों के बीच फोन पर 14 बार बात हुई थी। उनके बीच वीडियो कॉल पर भी बात हुई थी। दोनों के बीच हुई बातचीत के बाद सैंपल में गड़बड़ी हुई। बता दें, कि रईसजादे का पिता भी पुलिस की गिरफ्त में है। वहीं नाबालिग रईसजादे को बाल सुधार गृह में भेजा गया है।
ऑपइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में ससून अस्पताल के डीन डॉ विनायक काले ने दावा किया है, कि अजय तावड़े की नियुक्ति स्थानीय विधायक सुनील तिंगरे के कहने पर हुई थी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री हसन मुश्रीफ़ को कहकर डॉ अजय तावड़े की नियुक्ति करवाई थी। इससे पहले तावड़े पर किडनी ट्रांसप्लांट और ड्रग मामले में आरोप थे। वहीं डीन विनायक काले को भी छुट्टी पर भेज दिया गया है।
बता दें, कि 19 मई, 2024 की रात को पुणे के कल्याणीनगर इलाके में एक नाबालिग रईसजादे ने अपनी करोड़ों की पोर्शे कार से दो बाइक सवार को रौंद दिया था। दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और उनकी इस हादसे में दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद नाबालिग को सिर्फ 15 घंटे में ही जमानत मिल गई थी। उसे जमानत के लिए 300 शब्दों का निबन्ध लिखने को कहा गया था। बाद में इस मामले के तूल पकड़ने के बाद उसकी जमानत खारिज हो गई थी।