
(फोटो साभार : Uttarakhand Police twitter)
उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ ने आनलाइन ट्रेडिंग का लालच देकर 1200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के एक मेंबर को दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया है। एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने मीडिया को जानकारी दी, कि गिरोह के सदस्य फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को फोन या मैसेज भेजकर आनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर निवेश करने और अधिक मुनाफा कमाने का लालच देते थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित जितेंद्र कुमार दिल्ली का रहने वाला है। वर्ष 2021 में दर्ज मुकदमे में एसटीएफ अब तक गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर चुकी है। एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया, कि चार सितंबर 2021 को अमित कुमार निवासी ज्वालापुर हरिद्वार ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी, कि उन्हें अनजान शख्स ने व्हाट्सएप पर मैसेज कर आनलाइन ट्रेडिंग का झांसा दिया था।
फ़र्ज़ी कम्पनी बनाकर पैसे कमाने का लालच देकर ₹1,200 करोड़ का स्कैम करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को #UttarakhandPolice STF ने दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया।#ApraadhParPrahaar#UKPoliceFightsCrime pic.twitter.com/R8hCXV0yMw
— Ashok Kumar IPS (@AshokKumar_IPS) March 9, 2023
साइबर ठग ने उन्हें सोना, रेडवाइन और मसाले की ट्रेडिंग में निवेश कर अधिक लाभ कमाने का लालच दिया था। पीड़ित ने व्हाट्सएप पर मैसेज करने वाले शख्स पर भरोसा करते हुए उसके बताये विभिन्न बैंक अकाउंट में 15 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन रुपये ट्रासंफर करने के बाद शख्स से संपर्क नहीं हो पा रहा है। साइबर पुलिस की जांच में सामने आया की, कि धोखाधड़ी के तार चीन और हांगकांग से जुड़े हुए है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच पड़ताल के दौरान सामने आया, कि गिरोह अब तक 1200 करोड़ रुपये की साइबर ठगी कर चुका है। गिरोह द्वारा बनाई गई फर्जी वेबसाइट सिंगापुर में तैयार की गई थी। पुलिस को जाँच के दौरान पता चला, कि दिल्ली निवासी एक शख्स क्रिप्टो करेंसी के जरिये धन विदेश भी भेजता है। इसके बाद सूचना के आधार पर एसटीएफ की टीम ने दिल्ली शंकरपुर निवासी जितेंद्र कुमार को दिल्ली एयरपोर्ट से दबोच लिया।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के जाल में फंसने वाले लोगों को निवेश के नाम पर लाखो रुपये जमा करने के लिए कहा जाता है। रकम मिलने के बाद गिरोह के सदस्य निवेश करने वाले शख्स से संपर्क बंद कर देते थे। साइबर ठग के गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। गिरोह फिल्मो की स्क्रीनिंग के नाम पर भी करोडो रुपये क्रिप्टो करेंसी के जरिये से देश से बाहर भेज रहे थे। इस मामले में मुंबई के एक फिल्म निर्माता की भूमिका भी सामने आई थी।